Friday, 19 June 2020

ऑस्ट्रेलियन एवेन्यूज द्वारा पीयूष पण्डित को हुमिनिटेरियन सम्मान हेतु किया गया नामित


स्वर्ण भारत की सेवानीति को ऑस्ट्रेलियन न्यूज एजेंसी एवेन्यूज ग्रुप द्वारा सम्मानित होने का पत्र प्राप्त हुआ स्वर्ण भारत प्रवक्ता संतोष पांडेय ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा यह सम्मान स्वर्ण भारत परिवार के सभी सदस्यों को समर्पित है। यहां बता दें पीयूष पंडित स्वर्ण भारत परिवार और पीयूष ग्रुप के संस्थापक हैं। वह कई सालों से सोशल एक्टिविस्ट के रूप में काम कर रहे हैं। वह एक ईमानदार व्यक्ति है जो एक सूक्ष्म दिमाग और शुद्ध दिल के साथ संवेदनशील और सशक्त है।

उनका मकसद हमेशा लोगों की भलाई के लिए समर्थन और काम करना रहा है। उनकी संस्थाएं लोगों को जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित करती हैं। वह समाज के विकास और बेहतरी के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
अपने सामाजिक कार्यों के लिए, उन्होंने एक एनजीओ भी स्थापित किया है, जिसने अपनी सेवाओं को जनता के लिए परिश्रम से प्रदान किया है। उन्हें मान्यता मिली है और उसी के लिए विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
इसके अलावा, वह एक सफल उद्यमी और नेक्स्टजेन स्पीकर भी हैं।
उन्होंने राजनीति विज्ञान में अपनी स्नातक की डिग्री हासिल की है और सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर भी किया है।व्यवसायिक शिक्षा में अन्तराष्ट्रीय व्यवसाय में मास्टर हैं।
जितना अधिक हम दूसरों को खुश करेंगे, उतना ही हमारा अपना सुख होगा और हमारी मानवता की सेवा करने की हमारी भावना उतनी ही गहरी होगी। यह पीयूष के जीवन का आदर्श वाक्य रहा है।
पीयूष एक भावुक लेखक भी हैं और उन्होंने राजनीतिक मुद्दों, रोमांस और रहस्य सहित कई शैलियों पर कई किताबें लिखी हैं। उनके बहुमुखी व्यक्तित्व और रचनात्मक कार्य उनके कार्य और लेखन से स्पष्ट रूप से स्पष्ट हैं। उन्होंने मध्य विद्यालय में होने के बाद से अपने विचारों को कलमबद्ध करने के लिए एक झुकाव विकसित किया था और अब तक वह विभिन्न प्रमुख मुद्दों पर कई किताबें लिखने में कामयाब रहे हैं जो एक भविष्यवक्ता बन गए हैं।
पूरी तरह से एक गतिशील व्यक्तित्व, पीयूष विचारों का एक आदमी है और अपनी किताबों में उन सभी को शामिल करने की क्षमता है जो पाठकों पर एक अमिट छाप डालना चाहते हैं।और आज एक अन्तराष्ट्रीय लेखक व शोशल एक्टिविस्ट के रूप में जाने जाते हैं हाल ही में उनकी बुक द इन लॉक डाउन अन्तराष्ट्रीय स्तर पर सराही जा रही है।सेवानीति, स्वर्ण भारत लव इन लॉक डाउन, ई विलेज , संप्रभु, आँचल, व कई सारे सोशल रिसर्च पेपर  प्रकाशित हो चुके हैं ।यूथ डेवलपमेंट प्रोग्राम,माइल्स अहेड ,गौ ग्राम, नेशनल एम्प्लॉयमेंट रजिस्टर, आत्मनिर्भर युवा,जैसे तमाम प्रोजेक्ट अक्सर चर्चा के विषय में रहा है।

Sunday, 14 June 2020

स्वर्ण भारत की रक्तदान करने के लिए संगोश्ठी का आयोजन, युवा बढ़ चढ़ कर लें रक्तदान में रुचि : पीयूष पण्डित

स्वर्ण भारत की रक्तदान करने के लिए संगोश्ठी का आयोजन, युवा बढ़ चढ़ कर लें रक्तदान में रुचि : पीयूष पण्डित

ई विलेज कुंडा: स्वर्ण भारत परिवार राष्ट्रीय कार्यालय में आज रक्तदान जागरूकता हेतुं संगोश्ठी आयोजित की गई सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों को स्वर्ण भारत परिवार द्वारा रक्तदान किए जाने पर जोर दिया गया । इस मौके पर कार्यक्रम प्रभारी व जिला अध्यक्ष प्रतापगढ़ नीलेश शुक्ल ने कहा कि World Blood Donor Day 2020: हर साल 14 जून को दुनियाभर में विश्व रक्तदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे उद्देश्य रक्तदान को बढ़ावा देना है। 14 जून यानी विश्व रक्तदाता दिवस के  दिन रक्तदान करने के लिए लोगों के लिए कई जगह कैंप भी लगाए जाते हैं। विश्व रक्तदान दिवस सबसे पहली बार साल 2004 में मनाया गया था।

इस दिन को मनाने की शुरुआत सबसे पहले वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (World Health Organization) ने की थी। इस वर्ष विश्व रक्त दाता दिवस 2020 की थीम *सुरक्षि‍त रक्त, बचाए जीवन* ', *सेफ ब्लड सेव्स लाइव्स* (Safe blood saves lives)रखी गई है। स्वर्ण भारत परिवार के मुखिया सहित हज़ारों कार्यकर्ता वर्ष में कम से कम 4 बार रक्तदान करते हैं और कई सारे कैम्प स्वर्ण भारत के सहयोग से लगाये जाते हैं ।

Sunday, 7 June 2020

जीवन अमूल्य है इसे सार्थक बनाएं औरों को समर्पित करें

Make the best of where you are... Accept the situation you find yourself in and use it as a foundation on which you can build the life with the people you cherish. Value each moment of your life, appreciate it as a precious gift .Learn to be happy with what you already have, instead of making your happiness dependent on external influences, such as wealth and material things. Have compassion for others and see if you can give something back, by creating a value for others. Allow your creativity to flow, see where it leads you and never allow excuses to stand between you and the life you aspire☝️.

आप जहां हैं, वहां सबसे अच्छा बनाएं ... उस स्थिति को स्वीकार करें जिसे आप खुद में पाते हैं और इसे एक नींव के रूप में उपयोग करके आप उन लोगों के साथ जीवन का निर्माण कर सकते हैं जिन्हें आप संजोते हैं। 

अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को महत्व दें, इसे एक अनमोल तोहफे के रूप में सराहें। अपने खुशियों को बाहरी प्रभावों, जैसे कि धन और भौतिक चीजों पर निर्भर बनाने के बजाय, जो आपके पास पहले से है, उससे खुश रहें। दूसरों के लिए करुणा रखें और देखें कि क्या आप कुछ वापस दे सकते हैं, दूसरों के लिए खुशियां बनाकर। 

अपनी रचनात्मकता को बहने दें, यह देखें कि यह आपको कहां ले जाता है और कभी भी आप और आपके जीवन के आकांक्षा के बीच बहाने की अनुमति नहीं देता है।

Sunday, 19 April 2020

पूरे देश मे स्वर्ण भारत परिवार की सेवानीति का परचम हर एक सदस्य कोविड 19 के खिलाफ एक योद्धा की तरह उतरा

स्वर्ण भारत परिवार के संरक्षक श्री संतोष मिश्र लगातार 15 दिनों से कर रहें हैं जरूरतमंदों को  भोजन वितरण

नई दिल्ली : स्वर्ण भारत परिवार ने रविवार को देश मे किये जा रहे राहत कार्यों पर प्रेस रिलीज जारी की और बताया कि पूरे देश मे स्वर्ण भारत परिवार किस तरह से जरूरतमंदों की मदद में अग्रणी भूमिका निभा रहा है दिल्ली में कंट्रोल रूम की कमान स्वयं ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीयूष पण्डित ने सम्हाल रखी है , हेल्थ से सम्बंधित कार्यक्रमो की ज़िमेदारी डॉक्टर सीमा मिश्रा देख रही हैं आर्थिक अनुदान समेत वालंटियर और प्रशाशन और सरकार से टाई अप करने की ज़िमेदारी  दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अजिता सिंह बखूबी निभा रही है , जरूरत की सामाग्री उचित समय पर उपलब्ध कराने की जिमेद्दारी कॉर्डिनेटर अनुज शुक्ला के हाथों बखूबी निभाई जा रही सभी विंग सुरक्षित तरीके व प्रभावी ढंग से काम करें इसकी देख रेख हेतु वंदना शुक्ला अध्यक्षा दिशा फाउंडेशन लगातार अपनी सेवा दे रही हैं इसी तरह लखनऊ के प्रमुख समाज सेवी श्री संतोष मिश्रा पूरे परिवार सहित भोजन लेकर सुबह शाम पार्क में बैठ जाते हैं और जरूरतमंदों को बड़े ही स्नेह से भोजन करवा के पूर्ण जानकारी देकर ही विदा करते हैं, इस मौके पर स्वर्ण भारत परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीयूष पण्डित जी  ने दिल्ली से कहा कि संतोष जी के विचार और सेवानीति से पूरे स्वर्ण भारत को प्रेरणा मिलती है। सेवानीति कि *लखनऊ* में स्वर्ण भारत के विकास में श्रीमंत जी का मुख्य योगदान हैं, इसके अलावा मलिन बस्तियों में भी प्रशासन की अनुमति से दो पुलिस के जवान लेकर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर स्वर्ण भारत परिवार संस्था ने पका हुआ भोजन तथा कच्चा राशन भी वितरित किया और साथ में जिन लोगों को आर्थिक रूप से भी मदद की जरूरत पड़ी तो उसमें भी स्वर्ण भारत परिवार ने अपना  पूरा योगदान दिया। स्वर्ण भारत इसी तरह से सभी जिलों में राज्यों में अपने वॉलिंटियर्स द्वारा किए गए कार्य की सराहना करता है।दूसरी तरफ स्वर्ण भारत परिवार की सदस्य गीता पांडेय ने मध्यप्रदेश में कमान सम्हाली हैं वो स्वयं पूरे मुहल्ले को सेनिटाइजर से प्रतिदिन सिनीटाइज कर रही हैं और प्रतिदिन 40 जरूरदमन्दों को भोजन करवा रही हैं, स्वर्ण भारत की स्प्रिचुल विंग की प्रदेश अध्यक्ष सनमप्रीत कौर ने इंदौर में हर दिन स्टूडेंट्स को राहत सामग्री पहुँचाने के कार्य मे लगी हैं, स्वर्ण भारत परिवार अब तक *16 राज्यों* में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और 1100 परिवार को डायरेक्ट राहत सामाग्री भेजने का कार्य कर चुका है पूरे लॉक डाउन तक एक लाख परिवार तक राहत सामग्री व कैश ट्रांसफर की सेवा प्रदान करने में लगा है । जरूरी जानकारी देते हुए *दिल्ली* प्रदेश अध्यक्ष अजिता सिंह ने कहा कोटा के स्टूडेंट्स का मुद्दा पूरे देश मे स्वर्ण भारत परिवार ने उठाया था जिसके पश्चात उत्तरप्रदेश सरकार ने मांग को मानते हुए 250 बसों से उत्तरप्रदेश के सभी छात्रों को विशेष व्यवस्था से उनके जिले तक ले जाया गया, अन्य सभी सरकारों से लगातार बात हो रही अन्य प्रदेशों से जल्द ही स्टूडेंट्स को उनके घर छोड़ा जाएगा और इस संस्था से जितने भी लोग जुड़े हुए हैं और वह इस समय  जब देश एक बहुत बड़ी आपदा से जूझ रहा है ऐसे समय में अपनी सेवा नीति का परिचय दे रहे हैं।

 प्रदेश अध्यक्षो व जिलाध्यक्षों ने सम्हाली सेवानीति की कमान  मीनाक्षी शुक्ला जिला बैतूल से निशा रावल छत्तीसगढ से जयपुर से पूनम जी बिहार से मुकेश  झा के नेतृत्व झारखंड से स्वप्निल सिंहके नेतृत्व  *उत्तरप्रदेश* से आलोक तिवारी नेता के नेतृत्व में *राजस्थान* में कृष्णकांत जी के नेतृत्व में *हिमाचल* प्रदेश में मंजू अग्रवाल जी के नेतृत्व में *कश्मीर* में सोहेल बेग के नेतृत्व में सभी जिलों के अध्यक्षो से मिलकर सेवानीति पर कार्य युध्द स्तर पर जारी है स्वर्ण भारत परिवार के चेयरमैन पीयूष पंडित जी दिल से आभार व्यक्त करते हैं और उम्मीद करते हैं स्वर्ण भारत परिवार इसी तरह से जब भी कभी कहीं किसी को किसी भी तरह की सुविधा की जरूरत हो तो वह हमारे दिए गए नंबर पर कांटेक्ट करें स्वर्ण भारत परिवार उनका दिल से स्वागत करता है, और उनकी सेवा के लिए तत्पर है क्योंकि सेवा नीति ही हमारा मुख्य  उद्देश्य इस मौके पर सुरेश उपाध्याय अविनाश मिश्र व सुरेश पांडेय जी ने सेवानीति का परिचय देते हुए भोजन वितरण में सहयोग किया

अंतरिक्ष की दुनिया मे भारत की धमक आज के दिन से शुरू हुई आर्यभट्ट उपग्रह की सफल प्रयोग से : पीयूष पण्डित

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को आज एक महाशक्ति के रूप में देखा जाता है और बहुत से देश कम लागत में अपने उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए भारत पर निर्भर करते हैं। देश के अंतरिक्ष के इस सफर में 19 अप्रैल का खास महत्व है। दरअसल यही वह दिन है जब 1975 को भारत रूस की मदद से अपना पहला उपग्रह #आर्यभट्ट लॉन्च कर अंतरिक्ष युग में दाखिल हुआ। यह भारत का पहला वैज्ञानिक उपग्रह था। आइए जानें इसके बारे में खास बातें:
भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट का नाम मशहूर खगोलशास्त्री और गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था।
आर्यभट्ट ने पाई का सही मान 3.1416 निकाला था। आर्यभट्ट  उपग्रह  लॉन्च होने के 17 साल के बाद 11 फरवरी 1992 को पृथ्वी पर वापस आया।

रिजर्व बैंक को ने इस ऐतिहासिक दिन को सेविब्रेट करने के लिए 1976 और 1997 के 2 रुपए के नोट पर सैटेलाइट की तस्वीर भी लगाई थी।

360 किलोग्राम वजनी आर्यभट्ट को सोवियत संघ के इंटर कॉसमॉस रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भेजा गया था। 

आर्यभट्ट उपग्रह का मुख्य उद्देश्य एक्स रे, खगोल विद्या, वायुविज्ञान और सौर भौतिकी से जुड़े प्रयोग करना था। 

भारतीय सरकार को इस उपग्रह का नाम आर्यभट्ट रखने हेतु स्वर्ण भारत धन्यवाद देता है ।

वैज्ञानिकों में चार्ल्स डार्विन बचपन से मेरे पसंदीदा वैज्ञानिकों में से एक थे उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज बेहद ही उपयोगी: पीयूष पण्डित

चार्ल्स डार्विन का जन्म 12 फरवरी 1809 को इंग्लैंड के शोर्पशायर श्रेव्स्बुरी में हुआ था। उनके पिता रोबर्ट डार्विन चिकित्सक थे। उनका परिवार खुले विचारों वाला था। 

बचपन से ही चार्ल्स डार्विन प्रकृति और पशु-पक्षियों के व्यवहार के अवलोकन, बीटल्स की दुर्लभ प्रजातियां खोजने, फूल-पत्तियों के नमूने इकट्ठा करने में अपना समय गुजारा करते थे। उनका मन स्कूल में पढ़ाई जाने वाली ग्रीक, लैटिन एवं बीजगणित में नहीं लगता था। पिता रोबर्ट डार्विन बेटे चार्ल्स डार्विन को भी अपनी ही तरह चिकित्सा के क्षेत्र में भेजना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने चार्ल्स का दाखिला मेडिकल में कराया किन्तु वहां भी चार्ल्स डार्विन का मन नहीं लगा और उन्होंने बीच में ही मेडिकल की पढ़ाई छोड़ दी। वनस्पति शास्त्र में चार्ल्स  डार्विन की रूचि को देखते हुए बाद में उनका दाखिला कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में कराया गया जहां से 1831 में चार्ल्स डार्विन ने डिग्री प्राप्त की 

स्वर्ण भारत परिवार आज यानी 19 अप्रैल को डार्विन की पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धांजलि देता है

Tuesday, 14 April 2020

बाबा साहब भीमराव आंबेडकर पर किसी एक पार्टी य जाति का एकाधिकार नही बल्कि वो सभी वर्ग के युवाओ के प्रेरणा श्रोत : पीयूष पण्डित




नई दिल्ली संवाददाता : 20वीं शताब्दी के श्रेष्ठ चिन्तक, ओजस्वी लेखक, तथा यशस्वी वक्ता एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री डॉ. भीमराव आंबेडकर भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माणकर्ता हैं। विधि विशेषज्ञ, अथक परिश्रमी एवं उत्कृष्ट कौशल के धनी व उदारवादी, परन्तु सुदृण व्यक्ति के रूप में डॉ. आंबेडकर ने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. आंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक भी माना जाता है।उनके विचारों में एक भारत श्रेष्ठ भारत की झलक व समानता के अधिकार की चर्चा है किंतु राजनीतिक पार्टियों ने इसे एक जाति से जोड़ना शुरू किया जो दुर्भाग्य पूर्ण है।

कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए देशभर में लॉकडाउन है। किसी सार्वजनिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं है। ऐसे में बहुत से त्‍योहारों का रंग फीका पड़ गया है। इस दौरान महापुरुषों की याद में कार्यक्रम भी नहीं हो पा रहे। 14 अप्रैल को भारत की संविधान सभा के अध्‍यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती है। हर साल बड़े आयोजन होते थे मगर इस बार सब चारदीवारी के अंदर होगा

छुआ-छूत का प्रभाव जब सारे देश में फैला हुआ था, उसी दौरान 14 अप्रैल, 1891 को बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का जन्म हुआ था। बचपन से ही बाबा साहेब ने छुआ-छूत की पीङा महसूस की थी। जाति के कारण उन्हें संस्कृत भाषा पढने से वंचित रहना पड़ा था। कहते हैं, जहाँ चाह है वहाँ राह है। प्रगतिशील विचारक एवं पूर्णरूप से मानवतावादी बङौदा के महाराज सयाजी गायकवाङ ने भीमराव जी को उच्च शिक्षा हेतु तीन साल तक छात्रवृत्ती प्रदान की, किन्तु उनकी शर्त थी की अमेरिका से वापस आने पर दस वर्ष तक बङौदा राज्य की सेवा करनी होगी। भीमराव ने कोलम्बिया विश्वविद्यालय से पहले एम. ए. तथा बाद में पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की ।
उनके शोध का विषय “भारत का राष्ट्रीय लाभ” था। इस शोध के कारण उनकी बहुत प्रशंसा हुई। उनकी छात्रवृत्ति एक वर्ष के लिये और बढा दी गई। चार वर्ष पूर्ण होने पर जब भारत वापस आये तो बङौदा में उन्हे उच्च पद दिया गया किन्तु कुछ सामाजिक विडंबना की वजह से एवं आवासिय समस्या के कारण उन्हें नौकरी छोङकर बम्बई जाना पङा। बम्बई में सीडेनहम कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर नियुक्त हुए किन्तु कुछ संकीर्ण विचारधारा के कारण वहाँ भी परेशानियों का सामना करना पङा। इन सबके बावजूद आत्मबल के धनी भीमराव आगे बढते रहे। उनका दृण विश्वास था कि मन के हारे, हार है, मन के जीते जीत। 1919 में वे पुनः लंदन चले गये। अपने अथक परिश्रम से एम.एस.सी., डी.एस.सी. तथा बैरिस्ट्री की डिग्री प्राप्त कर भारत लौटे।
1923 में बम्बई उच्च न्यायालय में वकालत शुरु की अनेक कठनाईयों के बावजूद अपने कार्य में निरंतर आगे बढते रहे। एक मुकदमे में उन्होने अपने ठोस तर्कों से अभियुक्त को फांसी की सजा से मुक्त करा दिया था। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। इसके पश्चात बाबा साहेब की प्रसिद्धी में चार चाँद लग गया।

डॉ. आंबेडकर की लोकतंत्र में गहरी आस्था थी। वह इसे मानव की एक पद्धति (Way of Life) मानते थे। उनकी दृष्टी में राज्य एक मानव निर्मित संस्था है। इसका सबसे बङा कार्य “समाज की आन्तरिक अव्यवस्था और बाह्य अतिक्रमण से रक्षा करना है।“ परन्तु वे राज्य को निरपेक्ष शक्ति नही मानते थे। उनके अनुसार- “किसी भी राज्य ने एक ऐसे अकेले समाज का रूप धारण नहीं किया जिसमें सब कुछ आ जाय या राज्य ही प्रत्येक विचार एवं क्रिया का स्रोत हो।“
अनेक कष्टों को सहन करते हुए, अपने कठिन संर्घष और कठोर परिश्रम से उन्होंने प्रगति की ऊंचाइयों को स्पर्श किया था। अपने गुणों के कारण ही संविधान रचना में, संविधान सभा द्वारा गठित सभी समितियों में 29 अगस्त, 1947 को “प्रारूप-समिति” जो कि सर्वाधिक महत्वपूर्ण समिति थी, उसके अध्यक्ष पद के लिये बाबा साहेब को चुना गया। प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. आंबेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। संविधान सभा में सदस्यों द्वारा उठायी गयी आपत्तियों, शंकाओं एवं जिज्ञासाओं का निराकरण उनके द्वारा बङी ही कुशलता से किया गया। उनके व्यक्तित्व और चिन्तन का संविधान के स्वरूप पर गहरा प्रभाव पङा। उनके प्रभाव के कारण ही संविधान में समाज के पद-दलित वर्गों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के उत्थान के लिये विभिन्न संवैधानिक व्यवस्थाओं और प्रावधानों का निरुपण किया ; परिणाम स्वरूप भारतीय संविधान सामाजिक न्याय का एक महान दस्तावेज बन गया।

1948 में बाबा साहेब मधुमेह से पीड़ित हो गए । जून से अक्टूबर 1954 तक वो बहुत बीमार रहे इस दौरान वो नैदानिक अवसाद और कमजोर होती दृष्टि से भी ग्रस्त रहे । अपनी अंतिम पांडुलिपि बुद्ध और उनके धम्म को पूरा करने के तीन दिन के बाद 6 दिसंबर 1956 को अम्बेडकर इह लोक त्यागकर परलोक सिधार गये। 7 दिसंबर को बौद्ध शैली के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया जिसमें सैकड़ों हजारों समर्थकों, कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों ने भाग लिया। भारत रत्न से अलंकृत डॉ. भीमराव अम्बेडकर का अथक योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता , धन्य है वो भारत भूमि जिसने ऐसे महान सपूत को जन्म दिया'
ये सारी जानकारी कंपनी के मासिक (ऑनलाइन) बैठक और बाबा साहब के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित ऑनलाइन सेमिनार में पीयूष ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ के चेयरमैन  व स्वर्ण भारत परिवार के अध्यक्ष पीयूष पण्डित ने दी और युवाओ से अनुरोध किया की बाबा साहब को आदर्श के रूप में जीवन में उतारें