Sunday, 13 May 2018

Sunday, 22 April 2018

ब्राह्मणों ने क्षत्रियों को पुत्र से भी बढकर माना है।


ब्राह्मणों ने क्षत्रियों को पुत्र से भी बढकर माना है।
इस प्रसंग में रघुवंश और महाभारत से एक-एक प्रसंग रखना चाहूँगा। “एक ब्राह्मण के घर पर क्षत्रिय बालक नीति ज्ञान ले रहा था। उस ब्राह्मण देव के घर पङा अन्न तेज बारिश में बह जाता है। जिसके कारण उस ब्राह्मण का बच्चा और क्षत्रिय बालक भूख से व्याकुल हो उठते हैं। उन दोनों बालकों को भूखा देखकर ब्राह्मण भिक्षा मांगकर दो रोटी लाते हैं। तभी उनको याद आता है कि आज घर पर भोजन नहीं पका है, इसलिए गो-ग्रास भी नही दिया है। तो वे एक रोटी अपनी गैय्या को खिला देते हैं। बाकी एक रोटी अपनी पत्नी के हाथ पर रख देते हैं। दोनों पति-पत्नी विचार करते हैं दोनों बच्चों को ही खिला दिया जाए। पत्नी जब पहले अपने पुत्र को रोटी खिलाने लगती है तभी वह ब्राह्मण कहते हैं- “रुको देवी! यह अधर्म है इस पूरी रोटी पर अधिकार उस क्षत्रिय बालक का है। क्योंकी वह एक भविष्य का राजा है। वह भूख का शिकार हो जाएगा तो राज्य अनाथ रहेगा। राजसिंहासन सूना रहेगा। वही हमारा बालक शिकार होगा तो केवल यह हमारे लिए। यह कहकर उस रोटी को अपनी पत्नी से छीन लेते हैं और जाकर उस क्षत्रिय बालक को खिला देते हैं। आगे चलकर वह बालक राजा दिलीप बनते हैं और ब्राह्मण के उस परोपकारी रोटी का कमाल यह था कि राजा दिलीप इतने परोपकारी होते हैं कि एक गाय को बचाने के लिए अपना शरीर शेर को देने के लिए तैयार हो जाते हैं।
दूसरा प्रसंग महाभारत का है –” एक बार अश्वथामा अपने पिता गुरू द्रोणाचार्य के पास यह कहने लगता है पिता जी आप महर्षि परशुराम के बाद सबसे अच्छा धनुर्धारी है यदि सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी आपको बनाना ही है तो अर्जुन के बजाए मुझे बनाइये तब द्रोणाचार्य बोलते हैं, “अश्वत्थामा तुम तो केवल मेरे पुत्र हो। लेकिन अर्जुन समूचे हस्तिनापुर का पुत्र है। तुम सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बन भी जाओगे तो क्या करोगे? किंतु अर्जुन बनेगा तो वह देश और धर्म की रक्षा करेगा।
जब कभी क्षत्रिय वंश के आस्तित्व खतरे में पङा तब ब्राह्मणों ने आगे आकर रक्षा की
(1) सूर्यवंश के राजा वेन जो निःसंतान ही परलोक सुधार गये तो ऋषियों ने उनके शरीर को मंथन कर मंत्रबल से पृथु को प्रकट किया जिन्होने पूरी पृथ्वी पर शासन किया था।
(2) ठीक इसी तरह सूर्यवंश के दूसरे धरा के निःसंतान राजा के शरीर को मथ कर ऋषियों ने मिथि को उत्पन्न किया गया जिन्होनें मिथिला राज्य की स्थापना की।
(3) राजा दशरथ को पुत्र नहीं हो रहा था तो ब्राह्मण जमाता मुनि की युक्ति से वंश की रक्षा हुई।
(4) चंद्र वंश क्षत्रियों की तो उत्पति ही एक ब्राह्मण तपस्वी से हुई है। महर्षि अत्रि के पुत्र हुए चंद्र और उनसे जो वंश चला वह चंद्रवंश के रूप में ख्यात हुआ।
(5) भीष्म के ब्रह्मचर्य रहने के प्रतिज्ञा के कारण जब भरत वंश के आस्तित्व पर संकट आया तो महर्षि वेदव्यास ने उस वंश की रक्षा की।
राजपूत भी ब्राह्मणों को रक्षा करने के लिए खुद के जान दांव पर लगा देते थे
वें ब्राह्मणों के रक्षा के लिए प्राथमिकता देते थे। ग्रंथो में तो अनेक वृतांत है किंतु इस पर मध्यकालीन इतिहास से चर्चा करना चाहुंगा।
(1) एक बार महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह लङ रहे थे तभी बिच बचाव करने राजपुरोहित नारायणदास पालीवाल को शक्ति सिंह की तलवार लग गई इस घटना से महाराणा प्रताप इतने नाराज हो गये कि उन्होने तत्काल अपने भाई सिंह को राज्य से निकाल दिया।
(2) राजा कान्हङदेव अपने पुत्र विरमदेव की शादी खिलजी के बेटी फिरोजा से करने को इंकार कर दिया तो खिलजी ने 1310 बाङमेर पर आक्रमण कर भव्य महावीर मंदिर को तोङ दिया और भीनमाल से 45 हजार श्री माली वेद पाठी ब्राह्मणों को बंदी बना कर मेवाङ के खुडाला गांव में बंद कर दिया। तब उन ब्राह्मणों को छुङाने के लिए राजा कान्हङदेव चौहान ने आस-पास के सभी राजाओं को निमंत्रण भेजा जिसमें सोलंकी, गोहिल, राठौर ,परमार चंदेल और चावङा राजाओं ने राजा कान्हङदेव के साथ मिलकर खुडाला गांव में खिलजी के सेना पर आक्रमण कर 45 हजार ब्राह्मणों को छुङवाया। इस युद्ध में साल्हा सिंह ,शोभीत लाखन सिंह और अजय सिंह मोल्हावाल मारे गये थे।
(3) मेवाङ से हार के बाद लौटते समय महमूद ने 30 नवम्बर 1442 को कुंभलगढ के पास केलवाङा गांव के निकट बाणमाता मंदिर पर आक्रमण कर मंदिर तोङ डाला और मंदिर के पास रहने वाले 50 ब्राह्मण परिवारों के 140 लोगों को बंदी बना लिया। तब दो राजपूत सरदार भाला सिंह परिहार और वीर दीप सिंह ने घनघोर युद्ध कर ब्राह्मणों को तो छुङा लिया लेकिन इतने घायल हो गये थे कि वीरगति प्राप्त हो गये।
(4) 16 अगस्त 1679 को औरंगजेब के फौजदार तहवार खां ने जब पुष्कर तिर्थ पर आक्रमण कर दिया और वहां रहने वाले 80 ब्राह्मण परिवारों को बंदी बना लिया तो आलणियावास के राज सिंह राठौङ ,हरि सिंह राठौङ तथा केसरी सिंह राठौङ ने तीन दिनों तक घोर युद्ध कर पुष्कर तिर्थ की रक्षा की और 80 ब्राह्मण परिवारों को छुङवाया।
(5) 1679 में कारतलब खां और दराब खां ने खण्ठोले मंदिर पर जब आक्रमण कर मंदिर के 11 पूजारीयों को बंदी बनाकर खजाने के लिए पूछताछ करने लगा तो सुजान सिंह शेखावट, इंद्रभाण सुजान सिंह आदी ने अपना बलिदान देकर आक्रमण को निष्फल किया और ब्राह्मणों को छुङवाया।
अतः संक्षेप रूप से यह कहना चाहुंगा ब्राह्मण और क्षत्रिय के बीच अन्योनाश्रय संबध है दोनों ने एक-दूसरे को मान-सम्मान दिया है जो क्षत्रिय इतिहास और राजाओं के वीरता पर अंगुली उठा रहा है उसका DNA कदापि ब्राह्मण का नहीं हो सकता और जो क्षत्रिय ब्राह्मणों का मान-सम्मान और निरादर कर रहा हो उसका DNA एक क्षत्रिय का नही हो सकता।
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Tuesday, 20 March 2018

SC/ST Act


डटे रहो। हर बुराई का अंत इसी तरह होगा।
कोर्ट ने माना कि दलित एक्ट नाजायज है इसका दुरप्रयोग हो रहा है ।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत अपराध में सुप्रीम कोर्ट ने दिए दिशा निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस तरह के मामलों में अब कोई ऑटोमैटिक गिरफ्तारी नहीं होगी। इतना ही नहीं गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच जरूरी है। गिरफ्तारी से पहले जमानत दी जा सकती है।

Tuesday, 27 February 2018

स्वर्ण भारत परिवार करेगा बाबा रामदेव के खिलाफ कानूनी कार्यवाही- पीयूष पंडित

बाबा रामदेव के जीवन पर आधारित टीवी सीरियल ‘स्वामी रामदेव : एक संघर्ष डिस्कवरी जीत चैनल पर प्रसारित किया जा रहा है। जिसके पहले ही एपिसोड से विवाद खड़ा हो गया है। इस शो को लेकर ‘’स्वर्ण भारत परिवार’’ कड़ा विरोध जता रहा है। दरअसल, इस सीरियल के पहले ही एपिसोड में दिखाया गया है कि बाबा रामदेव जब माता के गर्भ में ही थे तभी से उन्हें और उनके परिवार को जातिवाद का भयंकर दंश झेलना पड़ा था। उसी जातिवाद के तहत उनके भाई को मूर्ति छू लेने भर की वजह से पेड़ से बाँध कर प्रताड़ित किया गया था। सरपंच के साथ मिलकर उनके घर को आग लगा दिया गया और उन्हें गाँव से भी निकाल दिया गया था। जातिवाद के कारण ही उन्हें पढ़ाई-लिखाई में भी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
सीरियल के इसी हिस्से की सत्ययता जानने के लिए स्वर्ण भारत परिवार के अध्यक्ष पीयूष पंडित ने बाबा रामदेव के जन्म स्थान महेंद्रगढ़ जिले के सैदअली पुर गाँव का दौरा किया। पीयूष पंडित का कहना है कि बाबा रामदेव का गाँव 80% के साथ यादव बाहुल्य गाँव है। जहां केवल एक ही परिवार ब्राह्मण का है। जिसे खुद यादवों ने बसाया है। उसमे सबसे ज्यादा सहयोग खुद बाबा रामदेव के परिवार का रहा है। पूरे गाँव में सिर्फ यादव ही उच्च जाति के हैं। बाक़ी 20% पिछड़ी जाति से हैं। तो कैसे एक ब्राह्मण, 80% यादव जाति का शोषण कर सकता है..?? यदि बाबा रामदेव के कथानानुसार इसे सत्य भी मान लिया जाए तो भी सोचने का विषय यह है कि पूरा गाँव, यहां तक कि खुद बाबा रामदेव का परिवार ऐसे किसी भी शोषण से इंकार करता है। तो कैसे बाबा रामदेव की बात सत्य मान लिया जाए..??
बाबा रामदेव पूरी तरह सीरियल में झूठ दिखा रहे हैं। जिससे सर्व समाज में रोष व्याप्त हो गया है और समाज इस तरह के झूठ और देश में जातिगत द्वेष फैलाने वाले सीरियल का विरोध करता है।
पीयूष पंडित ने कहा कि टीवी पर प्रसारित हो रहे इस सीरियल में व्यवसायिक फायदे के लिए विभिन्न वर्गो में विष फैलाने की कोशिश की जा रही है। जो समाज और देश के लिए बहुत बड़ा खतरा है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि इसे सज्ञान में लेते हुए तत्काल इसका प्रसारण बंद करें तथा बाबा रामदेव ने जो सहानुभूति बटोरने और पब्लिसिटी के लिए झूठी कहानी का सहारा लेकर पूरे ब्राह्मण समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उसके लिए लिखित माफी मांगें अन्यथा स्वर्ण समाज उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेगा।


Tuesday, 20 February 2018

Swabhiman Relly

जानिये महाक्रांति का सच..... 
#अन्ना_आंदोलन के बाद देश में अन्ना जी का कद बहुत ऊँचा हो गया था। जिससे प्रभावित होकर रामदेव बाबा ने भी अगस्त 2012 में अनशन का प्लान बनाया। लेकिन दिक्कत ये थी कि वर्तमान कांग्रेस सरकार अन्ना आंदोलन के बाद बहुत फूँक-फूँक कर कदम रख रही थी। इसलिए उसने अनशन की परमिशन सिरे से खारिज कर दी। लेकिन बाबा तो बाबा हैं। उन पर राजनैतिक महत्वाकांक्षा इस कदर हावी थी कि उन्होंने बिना परमिशन अपनी ''स्वाभिमान रैली'' चालू कर दी। इसमें ध्यान देने वाली बात ये है कि बाबा को रामलीला में ग्राउंड में सिर्फ और सिर्फ #योग सिखाने का परमिशन मिला था। #अनशन का नही। पर जिद्दी बाबा अनशन करने पर अड़े रहे। तो खूब धूम-धाम से अनशन की तैयारी चालू की गयी। खूब ऊंचा भव्य मंच बनाया गया। जिस पर बाबा कुछ करतब दिखाते और एक करतब के बाद मिडिया बाबा से कुछ सवाल करती। मीडिया वालों के लिए स्पेशल इंतजाम था। उनके लिए भी खूब ऊंचा मंच बनाया गया था। मीडिया वालों के लिए अलग से खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था हो रखी थी। हरेक आसन के बाद मीडिया वाले बाबा से सवाल करते और बाबा उछल उछल कर जवाब देते। बीच-बीच में बाबा के प्रवचनों से पता चलता कि सरकार(कांग्रेस) के नुमाइंदें बाबा से करना चाहते हैं। लेकिन मीडिया में जितनी भी ख़बरें आई थी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि बाबा को अनशन की कोई परमिशन नही मिली। उनको सिर्फ योग सिखाने की परमिशन मिली है। तो बाबा से बात करने का कोई सवाल ही पैदा नही होता। अनशन के बीच में कपिल सिब्बल ने टीवी पर एक लैटर दिखाया था कि बाबा ने अनशन वापिसी के लिए लैटर लिख कर दे दिया है कि शाम तक ये अपना तामझाम उठा लेंगें। इसलिए उनपर कोई कार्यवाही नही होगी। लेकिन अनशन शाम तक चलता रहा और रात में भी चालू था। रात काफी हो गयी थी लगभग मीडिया वाले जा चुके थे तो कुछ बाहर सुट्टा और चाय की चुस्की ले रहे थे। अचानक रात के अँधेरे में पुलिस आई और बाबा के चेलों को खदेड़ते हुए बोली। निकलों यहां से यहां योग के लिए परमिशन मिला था। अनशन के लिए नही। लेकिन बाबा के चेले चपाटों का तो मीडिया, इतना बड़ा मंच और भीड़ देखकर मनोबल बढ़ा हुआ था। कैमरों के स्टेण्ड पर जो ईंटें पड़ी थी, उठाई और लगे पुलिस को मारने। पुलिस ने भी जवाबी कार्यवाही के तहत लाठी चार्ज कर दिया और दो मिनट में पुलिसदल की फ़ौज बुला ली। जिसे देखकर बाबा और उसके चेले चपाटों के होश उड़ गए। अब सब भागने की फिराक में लग गए। उसी भागदौड़ में राजबाला नाम की महिला दब कर मर गयी और बाबा सलवार कुर्ती पहनकर भागने की कोशिश में धरें गए।
बाद में बाबा ने इस घटना के खिलाफ कोर्ट में केस किया। लेकिन यहां भी बाबा को मुंह की खानी पड़ी और उलटा बाबा पर ही जुर्माना ठोंका गया। इस तरह बाबा सिर्फ सीरियल में ही झूठ नही दिखा रहे हैं। बल्कि रामलीला ग्राउंड में झूठ बोलकर एक महिला की मौत के भी जिम्मेदार हैं।