Monday, 13 April 2020

जलियांवाला बाग हत्या कांड के बाद चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु ,4 जैसे हजारों युवाओं ने देशभर में मातृभूमि को मुक्त कराने का संकल्प दोहराया : पीयूष पण्डित



नई दिल्ली : जलियांवाला बाग के एक सौ एक साल पूरे हो गए। स्वर्ण भारत परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आज कांड को याद कर इस कांड की आलोचना की। इसे भारतीय इतिहास पर काला धब्बा बताया और अंग्रेजों से मांग की कि  भारत से माफी मांगनी चाहिए । 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में बैसाखी का मेला लगा था। दूसरी तरफ ब्रितानिया हुकूमत का विरोध करने के लिए क्रांतिकारियों ने रॉयल एक्ट के विरोध में वहां जनसभा बुलाई थी। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए ब्रिटिश जज सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता में बने रॉलेट एक्ट जिसमें प्रेस पर प्रतिबंध और नेताओं की जब चाहे बिना कारण बताये गिरफ़्तारी जैसे कड़े क्रूर कानून थे। इस एक्ट का विरोध पूरे देश में हो रहा था। अंग्रेजों को यह बात रास नहीं आ रही थी। वैसे भी यह उनके अहंकार को चुनौती थी। उनकी सत्ता को चुनौती थी। जलियांवाला बाग में जब सभा चल रही थी उस समय जनरल डायर ने 90 सैनिकों के साथ बाग को चारों ओर से घेर लिया और निहत्थे लोगों पर चौतरफा गोलियां बरसानी आरंभ कर दी। शासकीय आंकड़े बताते हैं कि जनरल डायर के इस अप्रत्याशित हमले में 484 लोग मारे गये थे जिसमें 50 मुस्लिम थे। 41 नाबालिग बच्चों के साथ अनेक दुधमुंहे बच्चों ने भी शहादत दी थी। सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। गैर सरकारी आंकड़े पर गौर करें तो हजार लोग शहीद हुए और दो हजार लोग घायल हुए थे। बाग के अंदर कुएं से उस समय दो सौ शव निकाले गये थे। कुछ दिनों बाद जब कुएं की सफाई हो रही थी तो कई नरकंकाल, नर मुंड मिले थे। कुल मिलाकर आजादी के आंदोलन का यह सबसे क्रूरतम नरसंहार था। उसकी भारत समेत विश्वभर में प्रतिक्रया हुई थी। श्रीमती एनी बेसेन्ट ने उसकी तुलना बेल्जियम में जर्मनों द्वारा किये गये अत्याचार से की तो रूसी निकोलाई तिखोनोवा ने 1905 में हुए पिट्सबर्ग हत्याकांड से किया। इस घटना से आहत गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर ने सर की उपाधि लौटा दी थी। सर शंकरन ने उनकी कार्यकारणी से इस्तीफा दे दिया था। आगे चल यह कांड अंग्रेजी सत्ता के लिए काल बन गया। गरम दल के नौजवानों की आंखों में खून उतर आया। चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु ,सुखदेव ,भगत सिंह जैसे हजारों युवाओं ने देशभर में मातृभूमि को मुक्त कराने का संकल्प दोहराया। 1857 की चिनगारी पुनः भड़क उठी। इस क्रूर जघन्य हत्याकांड को अपनी आंखों से देखने वाले 16 वर्षीय बालक क्रांतिकारी उधम सिंह कसम खाता है और 21 वर्ष बाद 13 मार्च 1940 को इस घटना के दोषी माइकल ओ डायर को लंदन में जाकर गोली मारकर संकल्प पूरा करता है। रॉलेट एक्ट क्रांतिकारियों के बीच खूब पढ़ी गयी। बाद में अंग्रेजी सत्ता ने इस पर प्रतिबन्ध लगाया। वर्षों बाद भी जब देश का युवा, नागरिक जब जलियांवाला बाग में जाता है तो उस मिट्टी से तिलक लगा कर देश की सुरक्षा का संकल्प लेता है। इस प्रेरणा भूमि से वन्देमातरम के नारे गूंजते हैं।लेकिन  दूसरी तरफ आज भी ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ की आवाज लगाने वाली ताकतें देश में सक्रिय हैं। कश्मीर से लेकर छत्तीसगढ़ के सुदूर जंगलों में जवान से लेकर नेता, जनता सबकी शहादत हो रही है। तथाकथित मानवाधिकारवादी, कलमकार, बुद्धिजीवी, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बौद्धिक, आर्थिक, न्यायिक सहयोग समर्थन विदेशी शह पर कर रहे हैं। आखिर अलगाववादी, आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देकर देश से लोकतंत्र खत्म कर, किस तरह के समाज की वे संकल्पना कर रहे हैं? भारत के टुकड़े क्यों करना चाहते हैं? आतंकवाद का समर्थन किस मानवता के पक्ष में है? आज अनेक प्रश्न हैं जिनका उत्तर राष्ट्रीय संकल्प ही होगा। लोकतंत्र ही सबके साथ ,सबके विकास की गारंटी है। जिसको मजबूत करना ही शहीदों के सपनों का भारत बनाना होगा, यही जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धाजंलि होगी।
इस देश को आजादी बड़ी मुश्किल से मिली थी। सवाल यह है कि हम उस आजादी का महत्व समझ भी पाए हैं? गुलामी के दिनों में हम पर अंग्रेजों का हमला होता था और आज हम पर हमारे अपने ही हमलावर हो रहे हैं। जब यह देश जलियांवाला कांड की 101 साल मना रहा है,। उस समय भी हमने अंग्रेजों और देश के बीच से देश को चुना था। राजीनीति  में भी हमें देश के व्यापक हितों को चुनने हैं। यह देश गुलाम ही इसलिए हुआ था कि इस देश में कुछ स्वार्थी लोगों का वर्चस्व हो गया था। आज एक बार पुनश्च उसी तरह के हालात हैं। ऐसे में हमें सोचना है कि हम देश को कहां ले जाना पसंद करेंगे। आतंकवाद की आग में, अलगाववाद की आग में, भाषा और प्रांत की लड़ाई में, जाति और धर्म की लड़ाई में देश का विकास अवरुद्ध हो रहा है। जलियांवाला बाग नरसंहार हमें निरंतर सोचने और देश के लिए कुछ नया करने की प्रेरणा देता है। काश, हम इस प्रेरणा को जीवन का आदर्श बना पाते। राष्ट्रीय कार्यालय की तरफ से आज शोक सभा व सभी शहीदों को  श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु सभी प्रदेशों में अध्यक्षो द्वारा घर मे ही शोक सभाएं प्रस्तावित की गई , कोरोना की वजह से प्रस्तावित अप्रैल 30 तक निरस्त हैं इसकी जानकारी स्वर्ण भारत  मीडिया सेल द्वारा दी गई ।

Sunday, 12 April 2020

कोरोना के खिलाफ जंग में उतरा स्वर्ण भारत परिवार, निभा रहा है अहम भूमिका

नई दिल्ली: कोरोना से बचाव को लेकर सरकार और प्रशासन के साथ स्वयंसेवी संस्था व राजनीतिक दल भी लगातार पहल कर रहे हैं। स्वयंसेवी संस्था द्वारा जरुरतमंदों के बीच राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। जबकि गांव मोहल्लों को सैनेटाइज किया जा रहा है। इस कड़ी में सबसे बड़ा नाम जो उभर के आया है वो युवाओं की पहली पसंद कहे जाने वाले पीयूष पण्डित का ट्रस्ट स्वर्ण भारत परिवार है, जो पूरे देश मे हज़ारो वालंटियर के साथ हर प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहा है देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है. कोरोना के एक्टिव पॉजिटिव मामलों की संख्या नौ हजार पर पहुंच गई है. अब तक भारत में कोरोना की वजह से लगभग तीन सौ लोगों की मौत हो चुकी है.
कोरोना से संक्रमित 643 लोगों को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है. देश के कई इलाके में कोरोना हॉट स्पॉट को चिह्नित किया गया है और उन्हें सील कर दिया गया है.
14 अप्रैल 2020 तक सभी विदेशी उड़ानों पर रोक लगाई जा चुकी है. अगर कोई व्यक्ति वाजिब कारण के बिना सड़कों पर टहलता पाया गया तो उसे जेल भेजा जा सकता है.
कोरोना संक्रमण से अब तक मौतों में बुजुर्गों की संख्या अधिक है. कोरोना वायरस अब तक दुनिया के 200 देशों में फैल चुका है. अमेरिका और इटली, स्पेन सहित कई यूरोपीय देशों में स्थिति बेकाबू हो गई है, कोरोना महामारी से जहां पूरी दुनिया डरी हुई है और करोड़ों लोग घर के अंदर कैद होने को मजबूर हैं, वहीं साल 2013 में रसायन शास्त्र का नोबल पुरस्कार जीतने वाले माइकल लेविट ने उम्मीद जगाई है. उनका कहना है कि जल्द कोरोना का खतरा कम हो जाएगा.

स्वर्ण भारत परिवार अपनी उपयोगिता कोरोना महामारी में में कुछ इस प्रकार साबित कर रहा है *हर दिन देश भर में पांच हज़ार लोगो को भोजन करवाना*
देश का पहला ट्रस्ट जो डायरेक्ट कैश ट्रांसफर की सुविधा दे रहा है

अब तक सौ से अधिक लोगो को डायरेक्ट कैश की सुविधा उपलब्ध कराई गई
हर दिन ऑनलाइन समस्यओं का निराकरण व जागरूकता अभियान

कोविड 19 कंट्रोल रूम की स्थापना जो संमस्यों को सीधे सरकार तक पहुँचाने का कार्य करता है

स्वर्ण भारत परिवार के राष्ट्रीय प्रवक्ता संतोष पांडेय ने कहा कि कुछ इलाके ऐसे हैं जहां ट्रस्ट अनाज पानी व घर की घरेलू समान नही पहुँचा पा रहा था इस पर कोर कमेटी की बैठक हुई जिसमें दिल्ली प्रदेश की कमान सम्हाल रही अजिता सिंह ने सुझाव दिया कि हमे डिजिटल इंडिया के प्रमोशन के तहत डायरेक्ट एकाउंट में राशन पानी हेतु पैसे भेजने चाहिए , इस सुझाव पर उत्तरप्रदेश महिला अध्यक्ष सीमा मिश्र जी ने विचार का समर्थन किया और कार्य योजना बनाने हेतु लीगल टीम तैयार की गई फिर ट्रायल बेस पर करीब दस लोगो को हज़ार से दो हज़ार प्रति व्यक्ति ट्रांसफर किया गया इस योजना की सफलता के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर लांच किया गया । बता दें स्वर्ण भारत सीमित संसाधनों के बावजूद अपने रिसर्च व नवीनतम कार्य प्रणाली की वजह से सुर्खियों में बना रहता है और यह पहला ट्रस्ट है जो किरायेदारों,स्टूडेंट्स,कॉलसेंटर कर्मी, युवा बेरोजगारों, सहित कम आय वाले सभी वर्गों की समस्याओं के समाधान में लगा है ।

वहीं स्वर्ण भारत परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना है स्वर्ण भारत एक परिवार है सभी कार्य आपसी सहयोग से ही सम्भव है हम सभी प्रदेशों की सरकार के साथ कदम मिला कर चल रहे हैं , शाशन प्रशाशन पर मजबूत गठजोड़ करके ही आम जनमानस को हम इस महामारी से बचा सकते हैं । केंद्र सरकार के साथ सभी राज्यों की सरकारों को एक साथ कार्य करते हुए देखना बहुत ही सुखद है उसी तरह स्वर्ण भारत परिवार सौ से अधिक संस्थाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रमो का ममज़बूत प्रबंधन कर रहा है ।

एक्टिव वालंटियर सुविधा जिससे आप अपनी भागीदारी निभा सकते हैं

1. फ़ील्ड कार्य/खाने का वितरण करना।
2. सोशल मीडिया के माध्यम से ज़रूरी सूचनाओं का प्रचार व अफ़वाहों को रोकना।
3. डोनेशन कार्य (धन/दवाइयां/खाना)
4. पशु व जानवरों की सुरक्षा व देखभाल
5. शिक्षा व स्वास्थ्य कैंप
6. घर बैठे ऑनलाइन शेशन
समस्त जानकारी कोऑर्डिनेटर स्वर्ण भारत परिवार द्वारा मीडिया को प्रस्तुत की गई और आम जनमानस से अपील की स्वर्ण भारत परिवार की सेवानीति से जुड़ कर राष्ट्र को मजबूत करने का करें प्रयास

Monday, 6 April 2020

भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत बताए, जो समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाते हैं : पीयूष पण्डित

महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसवी पूर्व बिहार में लिच्छिवी वंश के महाराज सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला के घर तीर्थंकर महावीर का जन्म हुआ। उनके बचपन का नाम वर्धमान था। महावीर स्वामी के दिखाए मार्ग पर चलने वाले जैन कहलाते हैं, जैन का तात्पर्य ही है जिन के अनुयायी। भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत बताए, जो समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाते हैं। यह सिद्धांत हैं- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। यहां पढ़ें महावीर स्वामी के कुछ विचार:

हर एक जीवित प्राणी के प्रति दया रखो. घृणा से विनाश होता है

सभी मनुष्य अपने स्वयं के दोष की वजह से दुखी होते हैं , और वे खुद अपनी गलती सुधार कर प्रसन्न हो सकते हैं।

 आत्मा अकेले आती है अकेले चली जाती है , न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है।
जिस प्रकार धागे से बंधी (ससुत्र) सुई खो जाने से सुरक्षित है, उसी प्रकार स्व-अध्ययन (ससुत्र) में लगा व्यक्ति खो नहीं सकता है।

जो सत्य जानने में मदद कर सके, चंचल मन को नियंत्रित कर सके, और आत्मा को शुद्ध कर सके उसे ज्ञान कहते हैं।
*इस शुभ अवसर पर स्वर्ण भारत परिवार ने जैन धर्म के अनुयायियों को राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका के निर्वाहन में योगदान देने को कहा* ।

Thursday, 2 April 2020

बच्चो को पुस्तक गिफ्ट करें व उन्हें डलवाएं पढ़ने की आदत : पीयूष पण्डित

बच्चो को पुस्तक गिफ्ट करें व उन्हें डलवाएं पढ़ने की आदत : पीयूष पण्डित 

नई दिल्‍ली: किताबों में पूरी दुनिया का ज्ञान छुपा होता है, लेकिन वर्तमान समय में किसी के पास किताब पढ़ने का टाइम नहीं है. हर कोई स्मार्टफोन में बिजी नजर आता है और अ ब यही आदत बच्चों में भी आने लगी है. बच्चे किताब छोड़ स्मार्टफोन पर ज्यादा समय बिताते हैं. कहा जाता है कि किताबें हमेशा जिंदा रहती हैं और किताबों के अक्षर ज्ञान का प्रतीक हैं. किताबों से प्रेरणा लेकर इंसान किसी भी हालात का सामना कर सकता है. इसलिए बच्चों को किताबें पढ़ने की आदत डालें.

2 अप्रैल को इंटरनेशनल चिल्‍ड्रेन्‍स बुक डे के मौके पर हम बच्‍चों के लिए अलग-अलग विद्वानों द्वारा कही गईं ज्ञान की बातें बता रहे हैं जो बच्‍चों के लिए प्रेरणा बन सकती हैं.
स्वामी विवेकानन्द : एक विचार लें. उस विचार को अपनी जिंदगी बना लें. उसके बारे में सोचिये, उसके सपने देखिये, उस विचार को जिए. आपका मन, आपकी मांसपेशिया, आपके शरीर का हर एक अंग, सभी उस विचार से भरपूर हो. और दुसरे सभी विचारों को छोड़ दे. यही सफ़लता का तरीका हैं.

अब्राहम लिंकन : हमेशा याद रखिये कि सफलता के लिए किया गया आपका अपना संकल्प किसी भी और संकल्प से ज्यादा महत्त्व रखता है.

डेल कार्नेगी : असफलता से सफलता का सृजन कीजिए. निराशा और असफलता, सफलता के दो निश्चित आधार स्तम्भ हैं.

अल्बर्ट आइंस्टीन : सफल आदमी बनने के बजाय एक महत्वपूर्ण आदमी बनने की सोचिये

नेपोलियन हिल : बोलने से पहले आपको दो बार सोचना चाहिए. क्योंकि आपके शब्द, किसी के मन में सफलता या असफलता के बीज बों सकते हैं.

गौत्तम बुद्ध : जिसने अपने को वश में कर लिया है, उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते.

अब्दुल कलाम : महान सपने देखने वालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं.

चाणक्य : कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयम से तीन प्रश्न कीजिए – मैं ये क्यों कर रहा हूं, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा. और जब गहरई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तभी आगे बढें.

महात्मा गांधी : खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं.

रबिन्द्रनाथ टैगोर : हर एक कठिनाई जिससे आप मुंह मोड़ लेते हैं,एक भूत बन कर आपकी नीद में बाधा डालेगी.

Swarna Bharat Parivar started Awareness Campaigns About World Autism Awareness Day, swarna Bharat Parivaar's Chairman Peeyush Pandit organized online talk show due to Covid 19 Lockdown

New Delhi :  World Autism Day is an internationally recognized day which is observed on April 2, every year. The member states of the United Nations are encouraged to spread awareness among the people about the Autism Spectrum Disorder. The general assembly resolution about the World Autism Day was passed in the council in November 2007 and it was adopted in December 2007. The very first World Autism Day was observed in the year 2008 on April 2. 

World Autism Awareness Day 2020 Theme
For the past few years, World Autism Day focuses on a specific theme which is determined by the United Nations. This year the World Autism Awareness Day 2020 Theme is 'The Transition to Adulthood'. United Nation believes that becoming an adult means being educated and having a certain amount of knowledge in social, economical and political life in one's community. However, the transition to
 adulthood is an important challenge for the people with autism because of the lack of opportunities and the support for this phase in their life.

Tuesday, 24 March 2020

टीबी से बचाव हेतु स्वर्ण भारत परिवार ने चलाया ऑनलाइन जागरूकता अभियान



विश्व क्षयरोग दिवस 24 मार्च

देश मे कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते स्वर्ण भारत परिवार टीबी पर होने वाले कार्यक्रम को स्थगित करके ऑनलाइन जागरूकता अभियान शुरू किया जिसकी सराहना पूरे देश मे हो रही है , टीबी (क्षयरोग) एक घातक संक्रामक रोग है, जो कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है। टीबी (क्षयरोग) आमतौर पर ज्यादातर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है।
 
जब क्षयरोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई उत्पन्न होता है, जो कि हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। ये ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई कई घंटों तक वातावरण में सक्रिय रहते हैं। जब एक स्वस्थ व्यक्ति हवा में घुले हुए इन माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई के संपर्क में आता है तो वह इससे संक्रमित हो सकता है।

विश्व टीबी दिवस के अवसर पर मंगलवार  को स्वर्ण भारत परिवार द्वारा ऑनलाइन जागरूकता अभियान चलाया गया । इसका आयोजन नेक्स्ट जेन की मीडिया टीम द्वारा प्रसारित किया जिसमें शोशल मीडिया के सभी सदस्यों  ने ऑनलाइन अपनी उपस्थिति दर्ज कराई ज्ञात हो कि कोरोना से बचने के उद्देश्य से स्वर्ण भारत परिवार ने 31 मार्च तल अपने सभी कार्यक्रम निरस्त किये हैं पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं बहुत सी एनजीओ के सदस्य शामिल हुए। स्वर्ण भारत परिवार के मुखिया पीयूष पण्डित लगातार अपने अनूठे कार्यों से सुर्खियां बटोरते रहते हैं और युवाओं को प्रेरित करते हैं ।

ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम की शुरूआत क्षयरोग उपचार के जनक डॉ. राबर्ट कोच के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस मौके पर ऑनलाइन जुड़े डॉक्टर्स ने  (टीबी) पर अपनी अपनी सलाह रखी *अजिता सिंह (महिला समाजसेवी) ने कहा कि टीबी शारीरिक ही नहीं समाजिक बीमारी भी है। कुपोषण  और गंदगी से इसका सीधा रिश्ता है। महिला, कुपोषित बच्चे, बूढ़े एवं डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को टीबी होने का खतरा अधिक होता है। केन्द्र एवं राज्य सरकार टीबी उन्मूलन के प्रति गम्भीर है। सरकार का 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य है*। इस दौरान डॉ. विराट सिंह, डॉ. सुनील सिंह, रवि सिंह, सत्य प्रकाश भारती, उपेन्द्र राय, केडी दूबे, एमसी पांडेय और संजयसिंह  रोहित सिन्हा, अनुज शुक्ला व स्वर्ण भारत परिवार के समस्त पदाधिकारी व सदस्य आदि ऑनलाइन मौजूद रहे।

Tuesday, 10 March 2020

The Inspiring People's Of India अवार्ड की शील्ड और सर्टिफिकेट थीम 2020 लांच


नई दिल्ली : होली के शुभअवसर पर पांच अप्रैल को होने वाले The Inspiring People's Of India का अवार्ड  शील्डलुक लांच किया गया जिसमे ब्लेक कलर का सर्टिफिकेट यूनाइटेड नेशन के 17 गोल्स को दर्शाया गया है और स्वर्ण भारत का स्वर्णिम लोगो समृद्धि को दर्शा रहा है विजेताओं के नाम के साथ उनके पद और अवार्ड का नाम भी लिखा गया है , शील्ड हर बार की तरह गोल्डन कलर जिसमे अवार्डीस के नाम व उनके पूर्ण विवरण दिए गए है , 

एक बार देखकर कृपया अपना बहुमूल्य सुझाव दें । हैप्पी होली