Tuesday, 20 March 2018

SC/ST Act


डटे रहो। हर बुराई का अंत इसी तरह होगा।
कोर्ट ने माना कि दलित एक्ट नाजायज है इसका दुरप्रयोग हो रहा है ।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत अपराध में सुप्रीम कोर्ट ने दिए दिशा निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस तरह के मामलों में अब कोई ऑटोमैटिक गिरफ्तारी नहीं होगी। इतना ही नहीं गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच जरूरी है। गिरफ्तारी से पहले जमानत दी जा सकती है।

Tuesday, 27 February 2018

स्वर्ण भारत परिवार करेगा बाबा रामदेव के खिलाफ कानूनी कार्यवाही- पीयूष पंडित

बाबा रामदेव के जीवन पर आधारित टीवी सीरियल ‘स्वामी रामदेव : एक संघर्ष डिस्कवरी जीत चैनल पर प्रसारित किया जा रहा है। जिसके पहले ही एपिसोड से विवाद खड़ा हो गया है। इस शो को लेकर ‘’स्वर्ण भारत परिवार’’ कड़ा विरोध जता रहा है। दरअसल, इस सीरियल के पहले ही एपिसोड में दिखाया गया है कि बाबा रामदेव जब माता के गर्भ में ही थे तभी से उन्हें और उनके परिवार को जातिवाद का भयंकर दंश झेलना पड़ा था। उसी जातिवाद के तहत उनके भाई को मूर्ति छू लेने भर की वजह से पेड़ से बाँध कर प्रताड़ित किया गया था। सरपंच के साथ मिलकर उनके घर को आग लगा दिया गया और उन्हें गाँव से भी निकाल दिया गया था। जातिवाद के कारण ही उन्हें पढ़ाई-लिखाई में भी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
सीरियल के इसी हिस्से की सत्ययता जानने के लिए स्वर्ण भारत परिवार के अध्यक्ष पीयूष पंडित ने बाबा रामदेव के जन्म स्थान महेंद्रगढ़ जिले के सैदअली पुर गाँव का दौरा किया। पीयूष पंडित का कहना है कि बाबा रामदेव का गाँव 80% के साथ यादव बाहुल्य गाँव है। जहां केवल एक ही परिवार ब्राह्मण का है। जिसे खुद यादवों ने बसाया है। उसमे सबसे ज्यादा सहयोग खुद बाबा रामदेव के परिवार का रहा है। पूरे गाँव में सिर्फ यादव ही उच्च जाति के हैं। बाक़ी 20% पिछड़ी जाति से हैं। तो कैसे एक ब्राह्मण, 80% यादव जाति का शोषण कर सकता है..?? यदि बाबा रामदेव के कथानानुसार इसे सत्य भी मान लिया जाए तो भी सोचने का विषय यह है कि पूरा गाँव, यहां तक कि खुद बाबा रामदेव का परिवार ऐसे किसी भी शोषण से इंकार करता है। तो कैसे बाबा रामदेव की बात सत्य मान लिया जाए..??
बाबा रामदेव पूरी तरह सीरियल में झूठ दिखा रहे हैं। जिससे सर्व समाज में रोष व्याप्त हो गया है और समाज इस तरह के झूठ और देश में जातिगत द्वेष फैलाने वाले सीरियल का विरोध करता है।
पीयूष पंडित ने कहा कि टीवी पर प्रसारित हो रहे इस सीरियल में व्यवसायिक फायदे के लिए विभिन्न वर्गो में विष फैलाने की कोशिश की जा रही है। जो समाज और देश के लिए बहुत बड़ा खतरा है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि इसे सज्ञान में लेते हुए तत्काल इसका प्रसारण बंद करें तथा बाबा रामदेव ने जो सहानुभूति बटोरने और पब्लिसिटी के लिए झूठी कहानी का सहारा लेकर पूरे ब्राह्मण समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उसके लिए लिखित माफी मांगें अन्यथा स्वर्ण समाज उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेगा।


Tuesday, 20 February 2018

Swabhiman Relly

जानिये महाक्रांति का सच..... 
#अन्ना_आंदोलन के बाद देश में अन्ना जी का कद बहुत ऊँचा हो गया था। जिससे प्रभावित होकर रामदेव बाबा ने भी अगस्त 2012 में अनशन का प्लान बनाया। लेकिन दिक्कत ये थी कि वर्तमान कांग्रेस सरकार अन्ना आंदोलन के बाद बहुत फूँक-फूँक कर कदम रख रही थी। इसलिए उसने अनशन की परमिशन सिरे से खारिज कर दी। लेकिन बाबा तो बाबा हैं। उन पर राजनैतिक महत्वाकांक्षा इस कदर हावी थी कि उन्होंने बिना परमिशन अपनी ''स्वाभिमान रैली'' चालू कर दी। इसमें ध्यान देने वाली बात ये है कि बाबा को रामलीला में ग्राउंड में सिर्फ और सिर्फ #योग सिखाने का परमिशन मिला था। #अनशन का नही। पर जिद्दी बाबा अनशन करने पर अड़े रहे। तो खूब धूम-धाम से अनशन की तैयारी चालू की गयी। खूब ऊंचा भव्य मंच बनाया गया। जिस पर बाबा कुछ करतब दिखाते और एक करतब के बाद मिडिया बाबा से कुछ सवाल करती। मीडिया वालों के लिए स्पेशल इंतजाम था। उनके लिए भी खूब ऊंचा मंच बनाया गया था। मीडिया वालों के लिए अलग से खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था हो रखी थी। हरेक आसन के बाद मीडिया वाले बाबा से सवाल करते और बाबा उछल उछल कर जवाब देते। बीच-बीच में बाबा के प्रवचनों से पता चलता कि सरकार(कांग्रेस) के नुमाइंदें बाबा से करना चाहते हैं। लेकिन मीडिया में जितनी भी ख़बरें आई थी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि बाबा को अनशन की कोई परमिशन नही मिली। उनको सिर्फ योग सिखाने की परमिशन मिली है। तो बाबा से बात करने का कोई सवाल ही पैदा नही होता। अनशन के बीच में कपिल सिब्बल ने टीवी पर एक लैटर दिखाया था कि बाबा ने अनशन वापिसी के लिए लैटर लिख कर दे दिया है कि शाम तक ये अपना तामझाम उठा लेंगें। इसलिए उनपर कोई कार्यवाही नही होगी। लेकिन अनशन शाम तक चलता रहा और रात में भी चालू था। रात काफी हो गयी थी लगभग मीडिया वाले जा चुके थे तो कुछ बाहर सुट्टा और चाय की चुस्की ले रहे थे। अचानक रात के अँधेरे में पुलिस आई और बाबा के चेलों को खदेड़ते हुए बोली। निकलों यहां से यहां योग के लिए परमिशन मिला था। अनशन के लिए नही। लेकिन बाबा के चेले चपाटों का तो मीडिया, इतना बड़ा मंच और भीड़ देखकर मनोबल बढ़ा हुआ था। कैमरों के स्टेण्ड पर जो ईंटें पड़ी थी, उठाई और लगे पुलिस को मारने। पुलिस ने भी जवाबी कार्यवाही के तहत लाठी चार्ज कर दिया और दो मिनट में पुलिसदल की फ़ौज बुला ली। जिसे देखकर बाबा और उसके चेले चपाटों के होश उड़ गए। अब सब भागने की फिराक में लग गए। उसी भागदौड़ में राजबाला नाम की महिला दब कर मर गयी और बाबा सलवार कुर्ती पहनकर भागने की कोशिश में धरें गए।
बाद में बाबा ने इस घटना के खिलाफ कोर्ट में केस किया। लेकिन यहां भी बाबा को मुंह की खानी पड़ी और उलटा बाबा पर ही जुर्माना ठोंका गया। इस तरह बाबा सिर्फ सीरियल में ही झूठ नही दिखा रहे हैं। बल्कि रामलीला ग्राउंड में झूठ बोलकर एक महिला की मौत के भी जिम्मेदार हैं।

Friday, 12 January 2018

Yuva Diwas - Swami Vivekananda Jayanti


किसी भी देश का भविष्य उसके युवाओं पर ही निर्भर करता है। नयी प्रतिभा आने से देश को न सिर्फ तरक्की मिलती है। बल्कि देश का विकास भी सही तरह से होता है। इसलिए आप सभी को आगे बढ़ने के लिए ढ़ेरों शुभकामनाएं.. निरंतर प्रगति की और बढ़ें... ।
सभी युवाओं को #युवा_दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं... ।

Monday, 25 December 2017

Christmas Tree

अच्छा एक बात बताईये। अगर आपका पड़ोसी अपने माता या पिताजी का बर्थ डे सेलीब्रेट कर रहा होता है तो क्या आप भी उसी दिन अपने माता-पिताजी का बर्थ डे सेलिब्रेट करने लग जाते हैं?? नही न..?? तो दूसरे धर्म के त्यौहार का विरोध करने के लिए अपने धर्म.. अपने देवी-देवताओं का उपहास क्यों..?? क्या दिक्क्त है आपको कि वो अपना क्रिसमस ट्री सेलिब्रेट कर रहे हैं और आप उससे अपनी ''तुलसी माता'' की तुलना कर रहे हैं..?? उन्होंने तो आपसे कभी नही कहा कि आप भी क्रिसमस ट्री सेलिब्रेट कीजिये। आपकी मर्जी है सेलिब्रेट करिये अथवा मत करिये। अब अगर आप पर कोई इसे थोपता है। तो जाहिर सी बात है विरोध तो बनता है। लेकिन तब भी ये विरोध का कौन सा तरीका हुआ कि वो क्रिसमस ट्री सेलिब्रेट कर रहे हैं तो हम उसी दिन तुलसी दिवस मनायेंगें.. सचमुच हद है मूर्खता की...

Sunday, 24 December 2017

Manusmriti

सन् 1927 में अम्बेडकर ने ''मनुस्मृति'' को जलाने की घोषणा तो कर दी थी किन्तु इसके लिए कोई स्थान नहीं मिल पा रहा था। तब एक सच्चे मुसलमान ने अपनी निजी जमीन उपलब्ध करायी और वही गड्ढा खोदकर, उसमे आग लगाकर अम्बेडकर ने एक एक पन्ना फाड़कर मनु-स्मृति को जला दिया था। इसके पीछे अम्बेडकर का तर्क था कि - हमें भारत से वर्ण-व्यवस्था को या जातिवाद को पूरी तरह ख़त्म करना है। वह दिन था 25 दिसम्बर और आज भी जातिवाद को ख़त्म करने के लिए बड़े बड़े भाषण देकर कुछ संगठन इस दिन को "मनुस्मृति-दहन-दिवस" घोषित करके, मनुस्मृति को जलाने का कार्यक्रम बनाते हैं।

अब थोडा गहराई से समझिये कि भारत में जातिवाद के लिए क्या केवल मनुस्मृति ही दोषी थी या अब है? कुछ समय पूर्व ही एक कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि - ''भारत ही ऐसा देश है जहाँ लोग स्वयं को पिछड़ा घोषित करने के लिए संघर्षरत हैं''। यानि इनका कथित उद्देश्य है वर्णव्यवस्था को ख़त्म करना और साथ ही स्वयं को निरंतर हीन और पिछड़ा मानना और उसे गाते रहना। तो वर्तमान में ये संगठन और लोग स्वयं ही जातिवाद के सबसे बड़े पोषक क्यों नहीं समझे जाने चाहिए? और इनकी घातकता से बचाने के लिए हिन्दुओ को किस किसके चित्र, किसकी लिखी पुस्तके जलाने पर विचार करना चाहिए?

अगर वर्ण-व्यवस्था को ही ये जातिवाद कहते हैं तो फिर उसकी प्रथमाभिव्यक्ति तो वेद करते हैं। वह तो उपनिषदों में भी है। गीता में भी है। महाभारत में भी है। रामायण में भी है। इनके प्रति उदारता क्यों? दरअसल इसका कारण है कि इन सबको एक साथ जलाने की बात करें तो कई शम्भुनाथ पैदा होकर इनको ही जला देंगे। इसलिए बड़ी व्यवस्थित और धीमी प्रक्रिया के तहत मनुस्मृति के विरुद्ध दुष्प्रचार किया गया। मनुस्मृति को जो ठीक से समझने के योग्य थे उनका मुख्य उद्देश्य राजनीति करना था और उसके लिए उनकी पूरी निष्ठा उसे समझने के प्रति नहीं बल्कि केवल और केवल जलाने के, उसे मिटाने के प्रति थी। यही वे लोग थे जिन्होंने सवर्णों द्वारा दलितों पर अत्याचारों की बड़ी-बड़ी मार्मिक कथाएं कल्पना करके लिखी और जो समझ नहीं सकते थे उन्हें भड़काया। इनका उपयोग किया। इसके पीछे एक स्पष्ट उद्देश्य था - हिन्दुओं को कमजोर करना और उन्हें तोडना, आपसी द्वेष फैलाना.. और हिन्दू-विरोधी-तत्वों को सहायता पहुंचाना।

आप स्वयं देखिये और पूछिये भी कि - ये मुसलमान और कम्युनिष्ट इस काम में सदैव तुम्हारे साथ क्यों होते है? आज भी मनुस्मृति के स्त्री-विरोधी होने की बात कहकर उसे जलाने का समर्थन करने वालो का साथ जो मुसलमान देते हैं क्या वे इसी तर्क के आधार पर कुरान या हदीसो को जलाना तो दूर उनकी किसी एक आयत या एक बात तक की भी निंदा करते हैं या कर सकते है? हिन्दुओ पर सबसे बड़ा प्रहार यही हो सकता है। इसीलिये कम्युनिष्टो का भी वर्ग जिसका काम भारत में केवल और केवल हिन्दू-धर्म का और इस राष्ट्र का विरोध एवं राष्ट्रविरोधी तत्वों एवं इस्लाम आदि हिन्दू-धर्म-विरोधी ताकतों का पोषण करना है। इन्होंने भी काफी संख्या में दलितों को भड़काकर उन्हें हिन्दू-धर्म-विरोधी बनाया। मतलब ये सब केवल एक दूसरे के लिए ऑक्सीजन की तरह काम करते है। उद्देश्य है हिन्दुओं को कमजोर करना।

मुसलमान और कम्युनिष्टों के अतिरिक्त अन्य भी स्वतंत्र स्वघोषित विचारक अपने स्वार्थ और धूर्तता के चलते इस बहते नाले में हाथ पैर मुंह सब धोते हैं। जैसे कि एक ड्रग्सखोर, घोर-अय्याश ओशो रजनिशाचर, जिसकी हवस से उसकी हवेली की कोई लेडीमोंक शायद ही बची होगी.. उसने कहा था कि - "शास्त्र तो हिन्दुओं और ब्राह्मणों के अहंकार की उदघोषणा है। इसलिए रावण को जलाना बंद करो। मनुस्मृति को प्रतिवर्ष जलाया जाना चाहिए"।  इस सनकी का उदाहरण काफी है इसे समझने के लिए जो पूर्व में कहा कि - "जो समझकर इस आग को भड़कने से रोकते, वे स्वयं अपने स्वार्थो के लिए, घी डाल रहे थे। रावण को हर वर्ष जलाएंगे तो इन्हें राम याद आयेंगे.. लगातार मनुस्मृति को जलाएंगे तो कभी तो राम के भी विरुद्ध हो जायेंगे। कृष्ण के विरुद्ध हो पायेंगे न।

लेकिन वास्तविकता यही है कि इनके ऐसे घृणित कुकृत्यों से कितने भी दलितों को ये बहका लें लेकिन इनका सामना अप्रत्यक्ष रूप से ईश्वरीय-आदेशों से है। हमेशा हमारे उन दलितों की ही संख्या सर्वाधिक रहेगी जो राम के हैं और मनुस्मृति के भी हैं। जय श्री राम और हर हर महादेव के उद्घोष करने वाला हमारा एक दलित, तुम्हारी उस अनपढ़ एवं मूर्ख भेड़ों की भीड़ पर भारी पड़ेगा।

ब्राह्मणवाद.. ब्राह्मणवाद चिल्लाते हैं। अगर ये इसे थोडा भी समझते तो समझ पाते कि यह कोई वाद मात्र नहीं है। यह एक प्रवाह है। जिसमे बहने से तुम हिन्दुओं को छोडो, अपने परिवारों के सभी सदस्यों तक को नहीं रोक सकते। भगवान शिव, श्री राम, कृष्ण सहित हमारे देवो के नाम को अगर मिटा सकते हो हिन्दुओ की स्मृति से, तो ही इसे नष्ट करने का स्वप्न देखो। जिसे तुम ब्राह्मणवाद कहते समझते हो। वह तो इसका आवरण मात्र है। तुम उससे ही विजय प्राप्त नहीं कर पा रहे तो इस आवरण के मध्य सुरक्षित जो शाश्वत अनश्वर प्रवाह है उस तक पहुंच भी कैसे पाओगे। नष्ट करने का तो स्वप्न भी कोई महामूर्ख व्यक्ति ही देख सकता है क्योंकि जिस आवरण से संघर्ष करने की तुम नौटंकी कर रहे हो बुद्ध भी उसी आवरण का एक भाग है.. लड़ते रहो स्वपरिभाषित.. स्वकल्पित नकली ब्राह्मणवाद से..।।जय श्री राम।।

Peeyush Pandit

अब देखिये #शर्मा होना तो उसका संयोग था.. वह #दलित भी होता तो भी हमें इतना ही प्रिय होता.. 
बाक़ी तो अच्छा है क्रिकेटर बन गया.. वरना नौकरी खोजता तो #आरक्षण के चलते हो सकता है उसका नंबर न आता और फिलहाल #मेक_इन_इंडिया जैसी फालतू चीज के चक्कर में फंसकर बैंक में लोन के लिए अप्लाई कर रहा होता..  
शाबाश #रोहित_शर्मा